
मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र से जुड़े हर परिवार में इस समय एक ही चर्चा है – “मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की अगली किस्त कब आएगी?” 11 जनवरी को राजधानी भोपाल में होने वाला किसान सम्मेलन इस प्रश्न का उत्तर दे सकता है, या फिर यह इंतजार और लंबा खिंच सकता है।
सम्मेलन का एजेंडा और किसानों की उम्मीदों के बीच का फासला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का प्राथमिक एजेंडा ‘2026 कृषि वर्ष’ की घोषणा और किसानों की आय दोगुनी करने के रोडमैप पर चर्चा है। यह एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, चूंकि आधिकारिक कार्यसूची में सीधे तौर पर योजना की किस्त का जिक्र नहीं है, इसलिए तत्काल कोई घोषणा होने की संभावना कम नजर आती है। संभव है कि सम्मेलन में जारी होने वाले कृषि कैलेंडर में आगामी योजनाओं और भुगतानों की समयसीमा का उल्लेख हो।
योजना का महत्व और केंद्र-राज्य का सहयोग
यह योजना इस मायने में विशेष है कि यह केंद्र और राज्य की सहायता को एक साथ जोड़ती है। जहां पीएम किसान सम्मान निधि केंद्र सरकार की ओर से 6,000 रुपये सालाना देती है, वहीं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना राज्य सरकार की ओर से उतनी ही अतिरिक्त राशि प्रदान करती है। यह ‘डबल इंजन की सरकार‘ की अवधारणा को किसान कल्याण में साकार रूप देती है। पिछली (13वीं) किस्त भी पीएम किसान की किस्त के तुरंत बाद जारी की गई थी, जिससे एक समन्वित प्रयास का पता चलता है।
किसानों के लिए सुझाव और आगे की राह
इस अनिश्चितता के बीच किसानों के लिए यह सलाह दी जाती है कि:
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वे https://saara.mp.gov.in/ पोर्टल पर अपना हितग्राही स्टेटस नियमित चेक करते रहें, ताकि किसी भी दस्तावेज संबंधी कमी को समय रहते दूर किया जा सके।
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आधिकारिक स्रोतों (कृषि विभाग, प्रशासन) से मिलने वाली सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
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इस बात का ध्यान रखें कि योजना का लाभ केवल पीएम किसान योजना के पंजीकृत लाभार्थियों को ही मिलता है।
निष्कर्ष:
11 जनवरी का सम्मेलन राज्य की कृषि नीति की दिशा तय करेगा, लेकिन 83 लाख किसानों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी तब होगी जब 14वीं किस्त की तारीख का ऐलान होगा। जानकार इसे फरवरी तक आने की संभावना मान रहे हैं। तब तक, किसानों का यह धैर्यपूर्ण इंतजार जारी रहेगा, क्योंकि यह छोटी सी आर्थिक मदद उनकी खेती-किसानी की दैनिक जरूरतों की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण जरिया है।






